रविवार, 14 फ़रवरी 2010

नज़राना

सूरज से किरणें
चांद से चांदनी
बादल से पानी
सागर से
लहरें
सीप से मोती
दीपक से ज्योति
पत्तों से ओस की बूदें
फूलों से खुशबू
प्यार से चाहत
ओठों से मुस्कान
जीवन से आनंद
प्रिय ब्लॉगरों के लिए
लाई मैं यह खुबसूरत
नज़राना बोलों
स्वीकार करोंगे।

13 टिप्‍पणियां:

  1. vaah jee kyon nahee sveekaar karenge ? dil me sajaa kar rakh liyaa hai shubhakaamanaayen maafee caahatee hoon mai akasar hindee me hee tippani detee hoon magar cafe hindi band kar cuki thi dobara comp. band kar ke chalana padegaa is liye mafi chahatee hoon

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  2. ऐसा नज़राना कौन स्वीकार करना नहीं चाहेगा. मुझे तो स्वीकार है.

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  3. इन ख़ूबसूरत नज़रानओं को कौन अस्वीकार करेगा?

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  4. जी बिल्कुल ... इतना मधुर तोहफा कौन ठुकराएगा ... बहुत सुंदर लिखा है ...

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  5. वाकई बेहद खूसूरत नजराना है.
    ...आभार.

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  6. Itna pyara nazrana kaun asweekar karega?
    Bahut sundar rachana hai!

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  7. आप सभी का बहुत धन्यवाद। आपके सुझाव हमारी प्रेरणा हैं।

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