रविवार, 10 जनवरी 2010

बादल

आसमान में बादल छाये,
काले,सफेद,छोटे-मोटे,
कई – कई आकृतियों वाले,
आसमान में बादल छाये।
रिम-झिम जल बरसाते,
नदी-ताल-तल सब भर जाते,
देख किसान का मन हरषाता,
बच्चो का भी दिल बहलाता,
आसमान में बादल छाये।
चातक अपनी प्यास बुझाता,
मेढ़क टर्र – टर्र गीत सुनाता,
बिरहन को पिया की याद सताती,
धरती अपना रूप संवारती,
आसमान में बादल छाये।


18 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत अच्छी रचना । बधाई । ऐसी रचनाओं की प्रतिक्षा रहेगी ।

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  2. प्रकृति से साक्षात्कार दिलचस्प है। बहुत अच्छी कविता।

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  3. इसमें चित्रात्मकता बहुत है। आपने बिम्बों से इसे सजाया है। ध्वनि बिम्ब या चाक्षुष बिम्ब का सुंदर तथा सधा हुआ प्रयोग। अलग तरह का संगीत, अद्भुत मुग्ध करने वाली।

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  4. आप सभी का धन्यवाद। इसी तरह हमारा मनोबल बढाते रहे।

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  6. आप सभी को हृदय से धन्यवाद देना चाहती हूँ। आगे भी आपसे ऐसी ही उम्मीद रखती हूँ कि इसी तरह हमारा मनोबल बढाते रहे और मैं आपकी कसौटी पर खरी ऊतरू।

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  7. बिम्बों का सुंदर प्रयोग
    बहुत सुन्दर रचना है
    बधाई
    मकर संक्रांति कि शुभकामनाएं


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  8. मोर भी नाचे ...... कवि का मन भी अकुलाता है ........ जब बादल छाता है .........
    अच्छी रचना .........

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  9. सुन्दर कवितायें बार-बार पढने पर मजबूर कर देती हैं.
    आपकी कवितायें उन्ही सुन्दर कविताओं में हैं.

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