बुधवार, 4 अगस्त 2010

सुख



सुख क्या है

क्षणिक अनुभूति

आनंद

राहत

सफलता

पूर्णता

खूशी

शान्ति या फिर

पूर्णता का इनाम

या फिर

चाह की पूर्ति

आकांक्षा की तृप्ति

या फिर

महत्वकांक्षा पर विजय

इच्छाओं का शमन

या फिर

दुख की पहचान ही

सुख है।

15 टिप्‍पणियां:

  1. प्यार के बाद सुख
    वाह
    ”महत्वकांक्षा पर विजय

    इच्छाओं का शमन

    या फिर

    दुख की पहचान ही

    सुख है।”
    इसे भी देखिये
    http://sanskaardhani.blogspot.com/2010/08/blog-post.html

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  2. यह एक ऐसा प्रश्न है जिसका उत्तर शायद कोई ढूँढ नहीं पाया ...

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  3. I dnt knw........but a hungry man can describe it, after eating a chapati.

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  4. बहुत अच्छी प्रस्तुति।
    राजभाषा हिन्दी के प्रचार प्रसार मे आपका योगदान सराहनीय है।

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  5. दुःख का विलोम है!
    एक तरह से सही कहा है आपने, दुःख की पहचान ही सुख है!
    ज़िंदगी में बहुत दुःख देखने के बाद................
    खूशी को ख़ुशी कर लीजिये!

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  6. गिरीश जी,मनोज जी ,इन्द्रनीलजी,विवेकजी,संजय जी,आशीषजी और हास्यफुहार एवं राजभाषा हिन्दी का बहुत ही शुक्रिया टिप्पणी देने के लिए।

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  7. बहुत गहरा सवाल है...सुख क्या है...शायद शांति है...जब शांति मिल जाए सुख स्वयं उसके साथ बंधा चला आता है...
    नीरज

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  8. Ab kya bataaye..Apna - apna nazriya hai.
    Vaise Ye post bahut achhi lagi.

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  9. नीरज जी,विरेन्द्रजी आपका बहुत धन्यवाद टिप्पणी देने के लिए।

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  10. सुख का अस्तित्व ही दुःख पर निर्भर है.

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  11. हेम पाण्डेय जी आपका धन्यवाद।

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  12. बहुत खूब ... सुख दुख से परे रहना ही सच्चा सुख है शायद ....

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