बुधवार, 26 मई 2010

ज़िन्दगी

ज़िन्दगी भी क्या चीज है
वक्त बेवक्त ला खडी़ करती है।
ऐसे चौराहे पर
जहां सब कुछ ऊलझ जाता है
रह जाती है कुछ यादें मीठी सी।
उन पलों को जीते-जीते।
कब बन जाती है यादें
पता ही नहीं चलता।
होश में आते ही
लगते हैं सोचने
कैसे बन गई ये यादें।
वो लड़ना-झगड़ा और बेबाकी बातें
उलझना फिर सुलझाना।
बन आलोचक टांग खींचना
फिर मार्गदर्शक बन
स्वप्नद्रष्टा बनाना।
अचानक यूं अलविदा कह
चले जाना, हो जाता है जानलेवा।
और रह जाती हैं यादें।
जिन्दगी भी क्या है
नित्य नूतन रूप है दिखलाती
हो जाते हैं विवश जीने को
उन लम्हों को, उन यादों को।

23 टिप्‍पणियां:

  1. जिन्दगी भी क्या है
    नित्य नूतन रूप है दिखलाती

    प्रशंसनीय रचना - बधाई

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  2. आपकी रचनाओं में एक अलग अंदाज है,

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  3. जीवन की सच्चाई को सच साबित करती एक बेहतरीन रचना के लिए बधाई।

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  4. Sadhna ji, aap achchha likhti hain. bahut bhavpravan hokar.

    www.bat-bebat.blogspot.com

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  5. आप सभी को प्रोत्साहन हेतु धन्यवाद।

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  6. सुन्दर.....
    सुघड़ कविता !

    कोमलकांत कविताई का अनुपम उदाहरण !

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  7. ...बहुत सुन्दर,प्रसंशनीय !!!

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  8. ज़िंदगी को आज तक कौन पढ़ पाया है...बस सोच ही बन कर रह जाती है...खूबसूरत अभिव्यक्ति...

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  9. यादे क्या नहीँ करतीं ?
    जो हो चुका
    वह नही करतीँ ।
    याद ?
    आह ! सतरंगी स्वाद ।

    उत्कृष्ट रचना ।

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  10. यादों यादें यादें .... इन यादों का क्या किया जाय ...
    अचानक से आ जाती हैं ... और बरसों तक साथ रहती हैं ..

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  11. वाह! बहुत सुन्दर रचना!

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  12. आप सभी का तहेदिल से शुक्रिया अदा करती हूं हौसलाअफजाई के लिए।

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  13. बहुत बढिया और खूबसूरत अभिव्यक्ति....

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  14. Kisi bhi insan ke liye yaaden ek amulya dharohar hoti hain.Hum me se kuchh log use yaad rakhte hain aur kuchh log bhul jate hain.apki yaaden sada apke sath rahen-meri kamna hai.yaaden hi to hame jiwan ke prati ashanwit banaye rakhti hain.

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  15. अच्छी कविता हर्षिता जी.... बधाई स्वीकारें..

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  16. अनमोल टिप्पणी देने के लिए धन्यवाद आप सभी का।

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  17. आईये, मन की शांति का उपाय धारण करें!
    आचार्य जी

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  18. धन्यभाग हमारे आचार्य जी जो आपके चरण पड़े हमारे ब्लाग पर।

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